ट्रांसफर-अटैचमेंट का ‘खेला’: आदिम जाति और स्वास्थ्य विभाग में रद्दी की टोकरी में सरकार का आदेश, चहेतों पर मेहरबान अफसर
बिलासपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने सूबे में प्रशासनिक कसावट लाने के लिए नई तबादला नीति के तहत सभी विभागों में अटैचमेंट (संलग्नीकरण) को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का कड़ा निर्देश जारी किया था। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने साफ कहा था कि जो जहां का है, उसे वहीं भेजा जाए। लेकिन मैदानी दफ्तरों में बैठे रसूखदार अफसरों के आगे सरकार का यह हंटर बेअसर साबित हो रहा है।
शिक्षा विभाग को पीछे छोड़ते हुए अब आदिम जाति विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग में अटैचमेंट का यह काला खेल धड़ल्ले से जारी है। रसूख और पहुंच के दम पर चहेते कर्मचारी ट्रांसफर के बाद भी अपनी पसंदीदा कुर्सियों से फेविकोल की तरह चिपके हुए हैं।

: आदिम जाति विभाग में ’11 दिन’ का चमत्कार, मुंगेली तबादला… पर बिलासपुर से मोहभंग नहीं
आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के कमिश्नर ने 15 सितंबर 2025 को एक ट्रांसफर लिस्ट जारी की थी। इस सूची में 10 कर्मचारियों के नाम थे, जिनमें से एक बड़ा नाम शिव नारायण यादव (कनिष्ठ लेखा अधिकारी) का था।
कागजी कार्रवाई: शिव नारायण यादव का तबादला कार्यालय सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास बिलासपुर से मुंगेली किया गया था।
रसूख का खेल: ट्रांसफर के महज 11 दिन बाद, यानी 26 सितंबर 2025 को विभाग के सचिव स्तर से एक नया आदेश चमका दिया गया।
अटैचमेंट का बहाना: ‘काम की अधिकता’ का बहाना बनाकर ट्रांसफर किए गए बाबू को मुंगेली भेजने के बजाय वापस बिलासपुर कार्यालय में ही अटैच कर दिया गया।

“शिव नारायण यादव को वर्तमान कर्तव्यों के साथ-साथ अस्थाई रूप से आगामी आदेश पर्यन्त बिलासपुर कार्यालय में कार्य संपादन हेतु आदेशित किया जाता है।”
बड़ा सवाल: पिछले आठ महीनों से यह ‘अस्थाई’ व्यवस्था स्थाई बनी हुई है। आखिर बिलासपुर दफ्तर में ऐसा कौन सा काम का पहाड़ टूटा हुआ है, जिसके लिए सरकार के नीतिगत फैसलों को भी ठेंगे पर रख दिया गया?
इसी तरह स्वास्थ्य विभाग में भी चहेतो को खास जगह दी जा रही हैं क्रमश..




