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एस्थेटिक अग्निकर्म, विद्धकर्म और कपिंग थेरेपी’ पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न​उज्जैन के मास्टर ट्रेनर डॉ. जितेन्द्र सोलंकी ने दिया मॉडर्न और आयुर्वेदिक पेन मैनेजमेंट तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण

Iएस्थेटिक अग्निकर्म, विद्धकर्म और कपिंग थेरेपी’ पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न
​उज्जैन के मास्टर ट्रेनर डॉ. जितेन्द्र सोलंकी ने दिया मॉडर्न और आयुर्वेदिक पेन मैनेजमेंट तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण
​बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर के ‘होटल द एमराल्ड’ में दो दिवसीय विशेष व्यावहारिक कार्यशाला का गरिमामय आयोजन किया गया। यह कार्यशाला ‘एस्थेटिक अग्निकर्म, विद्धकर्म एवं कपिंग थेरेपी’ विषय पर आधारित थी, जिसमें आधुनिक और प्राचीन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों के अनूठे समन्वय पर जोर दिया गया।


​कार्यशाला में मुख्य वक्ता और मास्टर ट्रेनर के रूप में उज्जैन से सुप्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. जितेन्द्र सोलंकी विशेष रूप से उपस्थित हुए। उन्होंने देश भर से आए संभागियों को पेन मैनेजमेंट और एस्थेटिक प्रोसीजर्स से संबंधित सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक (Hands-on) प्रशिक्षण दिया।
​जटिल बीमारियों और सौंदर्य समस्याओं का समाधान
​प्रशिक्षण के दौरान डॉ. सोलंकी ने आधुनिक एवं आयुर्वेदिक तकनीकों के माध्यम से विभिन्न जटिल रोगों के उपचार की बारीकियाँ सिखाईं। इसमें मुख्य रूप से:
​दर्द निवारण (Pain Management): साइटिका, घुटनों का दर्द, फ्रोजन शोल्डर, सर्वाइकल पेन, लम्बर पेन, टेनिस एल्बो, माइग्रेन और एड़ी का दर्द।
​सौंदर्य एवं त्वचा विकार (Aesthetic & Skin Care): तिल (Mole), मस्से (Wart), डार्क सर्कल, ऑयली स्किन, पिंपल्स, हेयर फॉल और पीलिया आदि रोगों का सफल उपचार।
​प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर रहा विशेष फोकस


​कार्यशाला की आयोजक डॉ. आरजू कुरैशी ने बताया कि प्रतिभागियों को केवल किताबी ज्ञान न देकर सीधे प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी गई। संभागियों को पीआरपी (PRP), हाइड्रा ट्रीटमेंट, इलेक्ट्रिक कॉटरी, पेन रिलीफ टेक्निक्स, एक्यूपंक्चर नीडल, फायर टेक्निक्स, हिजामा कप, ग्लास कप, कैनुला एवं डिस्पोजेबल सिरिंज जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का प्रत्यक्ष अभ्यास कराया गया।
​इन वरिष्ठ चिकित्सकों की रही सक्रिय सहभागिता
​इस गरिमापूर्ण आयोजन को सफल बनाने में क्षेत्र के कई नामचीन चिकित्सकों ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यशाला में मुख्य रूप से: डॉ. श्रुति थवाईत, ​डॉ. पायल शर्मा, डॉ. मोनिका पांडेय, डॉ. भूमिका साहू, डॉ. भारती महंत, डॉ. राजश्री सिंह, डॉ. वर्षा रात्रे, डॉ. संगीता कौशिक, डॉ. प्रियंका कौशिक, डॉ. भानु प्रसाद धिरहे, डॉ. पूर्वी, डॉ. ममता साहू एवं डॉ. सुमन केशरवानी की विशेष सहभागिता रही।


​सभी प्रतिभागियों को कार्यशाला के अंत में प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।

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