चिंगराजपारा सिटी डिस्पेंसरी बनी ‘सफ़ेद हाथी’, डॉक्टर-कर्मचारी गायब; आया के भरोसे सुशासन का ढोल!
भाजपा मंडल अध्यक्ष ने खोला मोर्चा, CMHO से लेकर ‘सुशासन तिहार’ तक पहुँची गूंज; क्या सिर्फ कागजों पर चल रहा है स्वास्थ्य विभाग?
बिलासपुर।
भूपेश सरकार गई और सुशासन का दावा करने वाली सरकार आई, लेकिन जमीनी हकीकत बदलने का नाम नहीं ले रही है। बिलासपुर के चिंगराजपारा स्थित सिटी डिस्पेंसरी इस वक्त घोर प्रशासनिक लापरवाही और सरकारी तंत्र की मक्कारी का सबसे बड़ा अड्डा बन चुकी है। यहाँ डॉक्टर से लेकर पूरा स्टाफ इस कदर बेलगाम हो चुका है कि अस्पताल खोलना तो दूर, ड्यूटी पर आना भी गवारा नहीं समझता। पूरा का पूरा अस्पताल भगवान भरोसे एक ‘वार्ड आया’ के सहारे चल रहा है!
वार्ड आया खोलती है ताला, बाकी स्टाफ नदारद!
सामने आई तस्वीरों के मुताबिक, बेलतरा भाजपा मंडल अध्यक्ष पवन कश्यप ने स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही के खिलाफ सीधे मुख्य चिकित्साधिकारी (CMHO) को पत्र लिखकर तीखे सवाल दागे हैं। शिकायत में साफ कहा गया है कि चिंगराजपारा हॉस्पिटल में सुबह 9 बजे सिर्फ एक ‘वार्ड आया’ ताला खोलकर अकेले बैठती है। डॉक्टर और बाकी के ठाठबाज कर्मचारी रोज लापता रहते हैं।
स्टाफ के हौसले बुलंद
आक्रामक लहजे में लिखे गए इस शिकायती पत्र से साफ है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इस निकम्मे स्टाफ के आगे बेबस नजर आ रहे हैं। मंडल अध्यक्ष और वार्ड के पार्षद कई बार खुद अस्पताल जाकर इस बदइंतजामी को सुधारने की चेतावनी दे चुके हैं, लेकिन सरकारी तनख्वाह तोड़ रहे इस बेपरवाह स्टाफ के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। इलाके के गरीब, बीमार मरीज इलाज के लिए तड़प रहे हैं और डिस्पेंसरी के ‘साहब लोग’ अपनी मनमर्जी चला रहे हैं।

’सुशासन तिहार’ में पहुंचा मामला, अब आर-पार की लड़ाई!
इस गंभीर मामले को लेकर आक्रोशित जनता और भाजपा नेता ने अब सरकार के ‘सुशासन तिहार 2026’ (आवेदन क्रमांक/शिविर दिनांक 21/05/2026, दरवाजा खटखटाया है। इस आवेदन को डॉ. प्रशांत रात्रे (Medical Officer, Ayushman Arogya Mandir) द्वारा CMHO को फॉरवर्ड भी किया गया है।
सीधा सवाल:
जब सत्ताधारी दल के मंडल अध्यक्ष की शिकायत पर भी यह हाल है, तो आम जनता की कौन सुनेगा? मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले इन लापरवाह डॉक्टरों और कर्मचारियों को आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है? क्या बिलासपुर CMHO इन ‘कामचोरों’ पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करने की हिम्मत दिखाएंगे, या फिर सुशासन का यह नारा सिर्फ विज्ञापनों तक ही सीमित रहेगा?
जनता अब जवाब मांग रही है





