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​ब्रेन ट्यूमर से कैंसर तक का सफर: बेबस पिता की जान बचाने के लिए ‘श्रवण कुमार’ बनी बेटी जानकी, आर्थिक तंगी बनी दीवार​कौशाम्बी की जांबाज बेटी जानकी तिवारी ने पिता उमाशंकर तिवारी को मौत के मुंह से खींचने के लिए झोंकी पूरी ताकत; इलाज के भारी खर्च के सामने अब टूटने लगी आस, समाज से लगाई गुहार।

​ब्रेन ट्यूमर से कैंसर तक का सफर: बेबस पिता की जान बचाने के लिए ‘श्रवण कुमार’ बनी बेटी जानकी, आर्थिक तंगी बनी दीवार

कौशाम्बी की जांबाज बेटी जानकी तिवारी ने पिता उमाशंकर तिवारी को मौत के मुंह से खींचने के लिए झोंकी पूरी ताकत; इलाज के भारी खर्च के सामने अब टूटने लगी आस, समाज से लगाई गुहार।
​प्रयागराज/कौशाम्बी। पिता और पुत्री का रिश्ता दुनिया के सबसे अनमोल धागों से बुना होता है, लेकिन जब वही पिता जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहा हो, तो एक बेटी किस हद तक जा सकती है, इसकी मिसाल उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले में देखने को मिल रही है। यहाँ की रहने वाली जांबाज बेटी जानकी तिवारी अपने पिता उमाशंकर तिवारी की जिंदगी बचाने के लिए एक ऐसी जंग लड़ रही हैं, जिसे देखकर हर किसी की आँखें नम हैं। ब्रेन ट्यूमर जैसी घातक बीमारी से शुरू हुआ यह दर्दनाक सफर अब कैंसर के रूप में तब्दील हो चुका है, जिसने पूरे परिवार को हिलाकर रख दिया है।


​उमाशंकर तिवारी पिछले लंबे समय से गंभीर अस्वस्थता से जूझ रहे हैं। शुरुआत में डॉक्टरों ने उनमें ब्रेन ट्यूमर की पुष्टि की थी, जिसके बाद से ही बेटी जानकी ने अपने पिता की तीमारदारी में दिन-रात एक कर दिया। बीमारी के इस लंबे और थका देने वाले सफर में परिवार ने अपनी जमापूंजी पानी की तरह बहा दी। लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था; हाल ही में इस बीमारी ने और भी भयानक रूप अख्तियार कर लिया और यह ट्यूमर अब कैंसर में तब्दील हो चुका है। इस नए और जानलेवा खुलासे ने पूरे परिवार के पैरों तले जमीन खिसका दी है।


​जहां ऐसे गंभीर संकट में लोग हिम्मत हार जाते हैं, वहीं जानकी तिवारी चट्टान की तरह अपने पिता के साथ खड़ी हैं। डॉक्टरों के चक्कर लगाने से लेकर अस्पताल के बेड के पास जागकर रातें गुजारने तक, जानकी ने हर वो संभव कोशिश की है जो एक संतान अपने माता-पिता को बचाने के लिए कर सकती है। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर जानकी के इस संघर्ष को देखकर लोग उन्हें आधुनिक दौर की ‘श्रवण कुमार’ कह रहे हैं।
​लेकिन इस भावुक और मानवीय संघर्ष के आड़े अब एक बेहद कड़वी हकीकत आ खड़ी हुई है—आर्थिक बदहाली। कैंसर जैसी लाइलाज और खर्चीली बीमारी का इलाज करवा पाना एक सामान्य या कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवार के लिए नामुमकिन सा होता है। उमाशंकर तिवारी के इलाज में अब तक लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं, जिसके कारण परिवार कर्ज के दलदल में डूब चुका है। अब हालत यह हो गई है कि आगे की कीमोथेरेपी, दवाइयों और अस्पताल के खर्चों को वहन करने के लिए उनके पास पर्याप्त साधन नहीं बचे हैं।
​आर्थिक तंगी की यह अभेद्य दीवार अब एक बेटी के हौसलों पर भारी पड़ने लगी है। अस्पताल के गलियारों में बेबसी की स्थिति में बैठी जानकी की आँखें अब सरकार, प्रशासन और समाज के संवेदनशील नागरिकों की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देख रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यदि समय पर सही और उच्च स्तरीय इलाज निर्बाध रूप से जारी रहा, तो उमाशंकर तिवारी की जान बचाई जा सकती है, लेकिन इसके लिए एक बड़ी आर्थिक मदद की दरकार है।


मानवीय पुकार
​यह कहानी सिर्फ एक मरीज की नहीं, बल्कि एक बेटी के उस अटूट विश्वास की है जो अपने पिता को हारने नहीं देना चाहती। उमाशंकर तिवारी को इस समय न सिर्फ दुआओं की बल्कि समाज के सामूहिक आर्थिक सहयोग की भी सख्त जरूरत है। शासन-प्रशासन, सामाजिक संगठनों और दानदाताओं से विनम्र अपील है कि आगे आएं और इस संकट की घड़ी में जानकी तिवारी के हाथों को मजबूत करें, ताकि एक बेटी का अपने पिता के प्रति यह संघर्ष अधूरा न रह जाए।
​सहयोग के लिए जानकारी:
जो भी संवेदनशील नागरिक इस संकट की घड़ी में जानकी बेटी की मदद करना चाहते हैं, वे नीचे दिए गए नंबर पर सीधे संपर्क कर सकते हैं या सहयोग राशि भेज सकते हैं:
​संपर्क/सहयोग मोबाइल नंबर: +91 98265-29733

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