तोरवा अरपा घाट पर छठ महापर्व की धूम: महा आरती और स्वच्छता अभियान से तैयार हुआ विश्व का सबसे बड़ा स्थायी घाट
बिलासपुर। प्रकृति पूजन और सूर्य उपासना का अद्भुत महापर्व छठ की तैयारियाँ अब अंतिम चरण में पहुँच गई हैं। सूर्य देव और छठी मैया की आराधना को समर्पित यह चार दिवसीय उत्सव श्रद्धा, स्वच्छता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। व्रती 36 घंटे का निर्जला उपवास रखकर अपने परिवार और संतान की मंगलकामना करते हैं। इस व्रत में महिला और पुरुष दोनों समान रूप से भाग लेते हैं।
छठ पर्व में स्वच्छता का विशेष महत्व होने के कारण तोरवा स्थित अरपा नदी के पक्के घाट की सफाई पिछले पखवाड़े से लगातार चल रही थी। शनिवार को यहां अरपा मैया की महा आरती और दीपदान का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर समिति ने घाट को और अधिक स्वच्छ एवं सुंदर बनाने का संकल्प लिया।
रविवार की सुबह छठ पूजा समिति के सदस्य और पदाधिकारीगण कमर कसकर मैदान में उतरे और पानी के फव्वारों से घाट की पूरी सफाई की। परिणामस्वरूप घाट का हर कोना चमचमाने लगा है। लगभग 7 एकड़ क्षेत्र में फैले 850 मीटर लंबे घाट में 800 मीटर पक्का और 50 मीटर कच्चा घाट शामिल है। इसे विश्व का सबसे बड़ा स्थायी छठ घाट माना जा रहा है
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घाट की तैयारियों के कार्यक्रम:
रविवार: व्रती खरना का प्रसाद तैयार करेंगे।
सोमवार, 27 अक्टूबर, शाम 5:29 बजे: अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाएगा। व्रती सजाए हुए दउरे लेकर घाट पहुंचेंगे और नदी तट पर बेदी सजाकर सूर्य देव व छठी मैया की आराधना करेंगे।
मंगलवार, 28 अक्टूबर, सुबह 6:03 बजे: उदयमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण होगा।

सफाई अभियान में योगदान:
डॉ. धर्मेंद्र कुमार दास, प्रवीण झा, अभय नारायण राय, सुधीर झा, बी.एन. ओझा, एस.पी. सिंह, विजय ओझा, रौशन सिंह, रामप्रताप सिंह, हरिशंकर कुशवाहा, धनंजय झा, डॉ. कुमुद सिंह, अशोक झा, हेमंत झा, दिलीप चौधरी, रामसखा चौधरी, शशि नारायण मिश्रा, चंदन सिंह, विनोद सिन्हा, धीरज झा, मुन्ना सिंह, लव ओझा, पंकज सिंह, ए.के. कंठ सहित समिति के सभी सदस्यों ने अहम योगदान दिया।
घाट की भव्यता, स्वच्छता और महा आरती के आयोजन ने भक्तों में उत्साह और श्रद्धा का अनुपम अनुभव पैदा किया है।
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