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बिलासपुर बेलतरा , सांसों पर भारी प्रशासनिक लापरवाहीकरोड़ो का ‘स्मृति वन’ बना कबाड़खाना: 7 करोड़ की लागत से हुआ था सौंदर्यकरण, तालाब में नाले का गंदा पानी और काई भरा रास्ता; अब सिर्फ ‘स्मृतियों’ में सिमटने की कगार पर बेलतरा का गौरव

​बिलासपुर / बेलतरा:

सांसों पर भारी प्रशासनिक लापरवाही
करोड़ो का ‘स्मृति वन’ बना कबाड़खाना: 7 करोड़ की लागत से हुआ था सौंदर्यकरण, तालाब में नाले का गंदा पानी और काई भरा रास्ता; अब सिर्फ ‘स्मृतियों’ में सिमटने की कगार पर बेलतरा का गौरव
​एसईसीएल की 7 करोड़ की राशि बदहाली की भेंट चढ़ी; कभी हरियाली और सुकून का केंद्र रहा उद्यान आज बदबू, गंदगी और असामाजिक तत्वों का अड्डा बना।
​बिलासपुर / बेलतरा:
शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच जब कोई इंसान सुबह की ताजी हवा, सुकून और हरियाली की तलाश में निकलता है, तो वह किसी ऐसे आशियाने की उम्मीद करता है जहाँ उसका तन और मन दोनों तरोताजा हो सके। लेकिन बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के राजकिशोर नगर स्थित सबसे बड़े और प्रमुख उद्यान ‘स्मृति वन’ की दहलीज पर कदम रखते ही यह उम्मीद बदबू, मायूसी और व्यवस्था के प्रति आक्रोश में बदल जाती है। जिस उद्यान को कभी क्षेत्र के ‘फेफड़े’ और सौंदर्य के प्रतीक के रूप में संवारा गया था, वह आज विभागीय उदासीनता और प्रशासनिक लापरवाही का सबसे बड़ा दंश झेल रहा है। हालत यह है कि करोड़ों की लागत से तैयार हुआ यह स्मृति वन अब लोगों के जेहन में सिर्फ एक ‘स्मृति’ बनकर रहने की कगार पर पहुंच गया है।


विधायक का वाटर कूलर भी जंग की भेंट, एक घूंट पानी को तरसे लोग
​प्रशासनिक लापरवाही का सबसे जीवंत उदाहरण उद्यान में लगा वाटर कूलर है। आम जनता और मॉर्निंग वॉकर्स की मांग पर बेलतरा विधायक ने अपनी निधि से वाटर कूलर उपलब्ध कराया था, ताकि भीषण गर्मी में आने वाले लोगों को शीतल जल मिल सके। लेकिन अधिकारियों की अनदेखी के चलते पूरी गर्मी बीत गई, पर इस मशीन से एक घूंट पानी भी जनता को नसीब नहीं हुआ। देखरेख के अभाव में कूलर जंग खा रहा है।

​7 करोड़ का सौंदर्यीकरण और धरातल पर शून्य रखरखाव
​स्मृति वन के कायाकल्प और इसे एक विश्वस्तरीय सुंदर उद्यान बनाने के लिए एसईसीएल (SECL) ने 7 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की थी। जनता ने सोचा था कि यह उनके क्षेत्र की शान बनेगा, लेकिन रख-रखाव के गंभीर अभाव में आज यह पूरा परिसर कबाड़ के ढेर में तब्दील हो चुका है। विकास के बड़े-बड़े दावे फाइलों में दबकर रह गए हैं और धरातल पर करोड़ों की यह संपत्ति बर्बादी के आंसू बहा रही है।
​तालाब बना नाला: काली हो चुकी जिंदगी और दम घोंटती बदबू
​उद्यान के भीतर आकर्षण का केंद्र रहा खूबसूरत तालाब आज प्रशासनिक संवेदनहीनता का सबसे घिनौना रूप दिखा रहा है। राजकिशोर नगर और आसपास के आवासीय क्षेत्र का गंदा नाला सीधे इसी तालाब में गिराया जा रहा है। नतीजा यह है कि कभी स्वच्छ जल से लबालब रहने वाला यह तालाब अब पूरी तरह से काला और जहरीला हो चुका है।
​तालाब से उठती सड़ांध और तीखी बदबू ने पूरे इलाके की हवा को जहरीला बना दिया है। जो बुजुर्ग, युवा और महिलाएं सुबह-शाम शुद्ध ऑक्सीजन लेने और व्यायाम करने आते हैं, उन्हें नाक पर रुमाल रखकर गुजरना पड़ता है। कई नियमित मॉर्निंग वॉकर्स का कहना है कि यहां आने से सेहत सुधरने के बजाय फेफड़ों और सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
​फिसलन भरे रास्ते, दुर्घटना को न्योता देती काई
​उद्यान में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है मानो महीनों से यहाँ झाड़ू तक नहीं लगी। वॉक-वे और पगडंडियों पर हरी काई की मोटी चादर जम चुकी है। सुबह की सैर पर आने वाले नन्हें बच्चे और बुजुर्ग हर कदम इस डर के साथ बढ़ाते हैं कि कहीं उनका पैर फिसल न जाए। प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, तभी इस काई को साफ करने की सुध नहीं ली जा रही।


​कबाड़ में तब्दील फूड सेंटर और असामाजिक तत्वों का डेरा
​कभी पर्यटकों और परिवारों के आकर्षण का केंद्र रहे फूड सेंटर आज खंडहर बन चुके हैं। चारों तरफ बिखरा कचरा, टूटी-फूटी दीवारें और गंदगी की भरमार यह साबित करती है कि व्यवस्था की नजरों से यह उद्यान पूरी तरह ओझल हो चुका है। शाम ढलते ही यह अंधेरा और लावारिस पड़ा परिसर असामाजिक तत्वों का अड्डा बन जाता है, जिससे परिवार के साथ आने वाले लोगों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
​सुलभ कॉम्प्लेक्स और आधारभूत ढांचे की बदहाली
​सुलभ शौचालय और कॉम्प्लेक्स की हालत इतनी दयनीय है कि वहां खड़ा होना भी नामुमकिन है। टूटे दरवाजे, जाम नल और फैली गंदगी स्वच्छता अभियान के दावों का खुला उपहास उड़ा रही है। बच्चों के खेलने के लिए लगाए गए झूले जंग खाकर टूट चुके हैं। झूले टूटने से मासूम बच्चों की हंसी गायब हो चुकी है और पार्क केवल मायूसी का परिचायक बन गया है।
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​ बदहाली पर पार्षद प्रीतेश सोनी ने जताई चिंता
​वार्ड पार्षद प्रीतेश सोनी ने स्मृति वन की बदहाली पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि, “स्मृति वन की वर्तमान स्थिति बेहद खराब और चिंताजनक है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी रखरखाव के अभाव में यह धरोहर बर्बादी की कगार पर है। तालाब में गंदा पानी जा रहा है और चारों तरफ अव्यवस्था है। हमने निगम प्रशासन से कई बार इस दिशा में ठोस कदम उठाने और जनता को राहत देने की मांग की है।”


​जिम्मेदार का बयान: प्राकलन तैयार, पीपीपी मॉडल पर होगा संचालन – जोन कमिश्नर भूपेंद्र उपाध्याय
​इस पूरे मामले पर नगर निगम जोन कमिश्नर भूपेंद्र उपाध्याय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा:
​”उक्त स्थल का माननीय विधायक जी एवं महापौर मैडम द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया था। यह स्थल पूर्व में कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर संचालित था। वर्तमान में जो भी संरचनाएं जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं, उनका प्राकलन (एस्टीमेट) तैयार किया जा रहा है। प्राकलन स्वीकृति के लिए शासन को भेजा जाएगा और स्वीकृति मिलने के उपरांत जीर्णोद्धार का कार्य कराया जाएगा। भविष्य में इसे पीपीपी (PPP) मॉडल के तहत संचालित करने की योजना है।”


​अवैध वसूली व तालाब की समस्या पर:
ठेका समाप्त होने के बाद भी टिकट वसूली के सवाल पर उन्होंने कहा कि “यह मामला संज्ञान में आया है, मैं तुरंत सब-इंजीनियर को भेजकर जांच करवाता हूँ और संपदा शाखा से चर्चा कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं तालाब के गंदे व बदबूदार पानी की तात्कालिक व्यवस्था एक-दो दिनों के भीतर दुरुस्त कराई जाएगी, साथ ही इसे अमृत मिशन फेज-2 में भी शामिल किया गया है। जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाएगा।”


​जनता का सवाल: कागजी आश्वासनों से कब तक चलेगी व्यवस्था?
अब देखना यह होगा कि नगर निगम और प्रशासन द्वारा दिए गए इन आश्वासनों पर धरातल पर कब तक काम शुरू होता है, या फिर बेलतरा का गौरव ‘स्मृति वन’ हमेशा के लिए कबाड़ में तब्दील हो जाएगा

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