🌿 आचार्य चरक — आयुर्वेद के अमर पुरोधा,आयुर्वेद के महान आचार्य चरक जी की निरामय आयुर्वेद धातुसाम्य चिकित्सा परामर्श केन्द्र, में मनायी गई जयंती,
निरामय आयुर्वेद के संकलन Medicinal plant & their uses का किया गया विमोचन

आयुर्वेद के महान आचार्य चरक जी की जयंती श्रावण शुक्ल पक्ष पंचमी के शुभ अवसर पर निरामय आयुर्वेद धातुसाम्य चिकित्सा परामर्श केन्द्र,राजकिशोर नगर,में बड़े ही उत्साह पूर्वक मनाई गई,साथ ही औषधीय पौधों की प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है।

इस अवसर पर राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित ख्यातिलब्ध लेखिका श्रीमती तुलसी देवी तिवारी जी के करकमलों से निरामय आयुर्वेद के संकलन Medicinal plant & their uses का विमोचन भी किया गया
उक्त अवसर पर वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक डा.विवेक दुबे द्वारा आमलोगों को औषधीय पौधों के उपयोग की सामान्य जानकारी भी प्रदान की गई, !
डॉ विवेक दुबे ने इस पावन अवसर पर कहा की
भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयुर्वेद के इतिहास में आचार्य चरक का स्थान अत्यंत गौरवपूर्ण है। वे न केवल महान वैद्य थे, बल्कि एक गहन चिंतक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाले विचारक भी थे। उनकी रचना ‘चरक संहिता’ आज भी चिकित्सा विज्ञान का अद्वितीय ग्रंथ मानी जाती है।

चरक जी का मानना था कि चिकित्सा केवल शरीर का नहीं, मन और आत्मा का भी उपचार है। उन्होंने कहा —
“स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणं, आतुरस्य विकार प्रशमनं।”
(अर्थात – स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा और रोगी के रोगों का शमन ही चिकित्सा का मुख्य उद्देश्य है।)
उनकी दृष्टि समग्र और मानवीय थी — जिसमें आहार, दिनचर्या, ऋतुचर्या, औषधि और संयम का अद्भुत समन्वय है।
श्रावण मास की पंचमी तिथि, जिसे हम चरक जयंती के रूप में मनाते हैं, यह न केवल स्मरण का दिन है, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और आयुर्वेद को अपनाने का संकल्प दिवस भी है।
आज के युग में, जब मानव आधुनिक रोगों से जूझ रहा है, चरक का मार्गदर्शन और भी प्रासंगिक हो गया है।



